मानव शरीर के पाचन तंत्र की जानकारी - Digestive System in Hindi

इस लेख में आप पढेंगे मानव शरीर के पाचन तंत्र के बारे में जिसे English में Digestive System कहते है. पाचन तंत्र मानव के पेट (Stomach) के अन्दर (Internal Part) का भाग है. जो शरीर को पोषण देने के लिए भोजन को पचाने का कार्य करता है इस लिए इसे पाचन तंत्र कहते है. इसके और भी कार्य है जो की हम इस लेख के माध्यम से विस्तार से जानेंगे तो चलिए शुरु करते है.


मानव शरीर का पाचन तंत्र - Human Digestive System in Hindi

भोजन - ये वे पोषक पदार्थ है जिन्हें प्रयोग में लाकर जिव उर्जा प्राप्त करते है.
पाचन - आहार नाल में भोजन, जल, अपघटन से छोटे एवं सरल अणुओं में विघटित होता है और अन्य अंगो से अवशोषित होकर रुधिर द्वारा शरीर की कोशिकाओं तक पंहुचाता ह, यह प्रक्रिया पाचन कहलाती है.
पोषण - ग्रहण भोजन को जैव रसायनिक क्रियाओं द्वारा उर्जा में परिवर्तन करना एवं शारीरिक क्षतिपूर्ति एवं वृदी हेतु उपभोग करना पोषण कहलाता है.

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पोषण दो प्रकार का होता है:

1. स्व पोषण : यह पोषण पोधों में पाया जाता है.
2. पर पोषण : वे जिव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते, बल्कि अन्य जिव और पादपों पर निर्भर करते है.

पोषण के आधार पर जीवों को निम्न वर्गों में बांटा गया है:

1. शाकाहारी : पेड़, पोधे एवं घास भक्षी उदाहरण - मवेशी !
2. मांसाहारी : अन्य जंतुओं के मांसाहारी दोनों उदाहरण - शेर, चिता !
3. सर्वाहारी : शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों उदाहरण - मनुष्य !
4. कीटाहारी : किटभक्षी उदाहरण - मेंडक, गिरगिट, छिपकली !
5. रुधिराहारी : अन्य जंतुओं के रुधिरभक्षी उदाहरण - खटमल, जोंक, मच्छर, जूं !
6. शलभ भोजी : भोजन विष्ठा के रूप में लेते है उदाहरण - सूअर !
7. मृतजीवी : मृत एवं सड़े-गले अवशेषों पर आश्रित उदाहरण - केंचुआ, अधिकांश कवक !
8. परजीवी : अन्य जीवों से भोजन प्राप्त करने वाले उदाहरण - गोल्कुर्मी, सूत्रकुर्मी !
9. होलोजोइक : प्रकाश संश्लेषण द्वारा पोधों के समान भोजन बनाने वाले उदाहरण - युग्लीना !

पाचन एवं पाचन की क्रियाविधि:

भोजन के पाचन की सम्पूर्ण प्रक्रिया पांच चरणों में पूरी होती है जो निम्न प्रकार है:(I) अंतर्ग्रहण (II) पाचन (III) अवशोषण (IV) श्वांगीकारण (V) मल परित्याग

पाचन में दो तरह की क्रियाविधि होती है:

अ. भौतिक क्रिया - भोजन को काटना, चबाना, निगलना, पचाना एवं मल के रूप में त्याग देना.
ब. रासायनिक क्रिया - एंजाइम की उपस्थिति में जैव रासायनिक क्रियाओं द्वारा भोजन के स्वरूप में परिवर्तन करना रासायनिक क्रिया के अंतर्गत आता है.
(I) अंर्तग्रहण - भोजन को मुख द्वारा ग्रहण करने की क्रिया अंर्तगर्त कहते है ! यहाँ भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में दांतों द्वारा चबाकर एंजाइमों की क्रिया हेतु प्रष्टिय क्षेत्रफल में वृद्धि की जाती है.
(II) पाचन - पाचन क्रिया आहारनाल के तीनअंगों मुख-गुहा, आमाशय एवं आंत्र में होती है.
(III) अवशोषण - पचित भोजन के रुधिर में पहुचने की क्रिया को अवशोष कहते है ! अवशोषण की क्रिया आंतों (मुख्यतः छोटी आंत) में संपन्न होती है.
(IV) स्वांगीकरण - अवशोषित भोजन के अवयवों को शरीर के उपयोग में लाने की क्रिया.
(V) मल परित्याग - भोजन के अपचित अव्यय छोटी आंत से बड़ी आंत में पहुँचते है जहाँ इसे मल में बदल दिया जाता है ! यहाँ से भोजन मलाशय में पहुँचता है.

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