महासागर कितने है और उनके नाम - Kitane Mahasagar Hai or Unke Name Kya Hai

पृथ्वी का ऊपरी भाग मुख्य रूप से दो तरह से बैठा हुआ है जिसमें पहला महाद्वीपीय भाग और दूसरा महासागरीय भाग हैं। महासागरीय भाग पृथ्वी का एक महत्वपूर्ण भाग है जिसका क्षेत्र महाद्वीपीय भाग से भी काफी ज्यादा है। लेकिन क्या आप जानते हैं पृथ्वी पर कितने महासागर हैं और पृथ्वी पर मौजूद महासागरों का नाम क्या है? अगर नही, तो आज हम आपको पृथ्वी पर मौजूद महासागरों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं.

महासागरों के बारे में कुछ सामान्य जानकारी

पृथ्वी का लगभग 70% भाग महासागरों से घिरा हुआ है। महासागर पर सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं। कहा जाता है कि पृथ्वी पर जीवन का आरंभ हुई महासागरों की वजह से ही हुआ है। महासागरों में पृथ्वी पर उपलब्ध समस्त जल का 97 प्रतिशत भाग समाया हुआ है। महासागरों की विशालता इतनी है कि अगर सभी महासागरों को केवल एक महासागर मान लिया जाए तो उसके सामने पृथ्वी के सभी महाद्वीप छोटे छोटे द्वीप लगेंगे.

महासागर व उनके नाम और उनके बारे में कुछ सामान्य जानकारी :

पृथ्वी पर कुल 5 महासागर है, जिनके नाम निम्न है :
1) प्रशांत महासागर (Pacific Ocean)
2) अंध महासागर (Atlantic Ocean)
3) हिन्द महासागर (Indian Ocean)
4) दक्षिणा ध्रुवीय महासागर (Antarctic Ocean)
5) उत्तर ध्रुवीय महासागर (Arctic Ocean)

आइये अब सब महासागर के बारे में विस्तार से जाने :

1) प्रशांत महासागर : प्रशांत महासागर पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़ा और गहरा महासागर है। यह महासागर सबसे अधिक मूल्यवान धातुओं का मालिक भी है। इस महासागर का स्थल भाग कम और जलीय भाग काफी ज्यादा है। प्रशांत महासागर की एक खासियत यह है कि यह एशिया और अमेरिका को अलग करता है। अत्यधिक विस्तृत होने के कारण प्रशांत महासागर का अध्ययन कार्य काफी जटिल है लेकिन कुछ साहसी वैज्ञानिकों और नागरिकों के द्वारा इसका अध्ययन कार्य किया गया व आज भी किया जा रहा है। प्रशांत महासागर की जानकारी सबसे पहले पेटरब्युक ने प्राप्त की और उसके बाद बैलबोआ, मागेमेनदान्या, हॉरिस और कुकु आदि वैज्ञानिकों ने इस में सफलता प्राप्त की। प्रशांत महासागर का क्षेत्रफल 161,800,000 किलोमीटर स्क्वायर माना जाता है। प्रशांत महासागर के प्रमुख द्वीप समूह ताहिती, रोरोटोंगा, बोंगेविल्ले और यवप द्वीप आदि है.
2) अंध महासागर : क्षेत्रफल की दृष्टि से अंध महासागर यानी कि अटलांटिक महासागर दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा महासागर है। अंध महासागर का क्षेत्रफल करीब 106,500,000 किलोमीटर स्क्वायर माना जाता है। अटलांटिक महासागर ने पृथ्वी का 1/5 भाग घेर रखा है। अटलांटिक महासागर के प्रमुख द्वीप समूह में आयरलैंड,अशेनशियन द्वीप, बुवेत द्वीप वूर दक्षिण जॉर्जिया द्वीप आदि आते है। यह महासागर दुनिया का सबसे उपयोगी महासागर माना जाता है क्योंकि इसमें सबसे अधिक परिवहन होता है। व्यापार की दृष्टि से भी यह महासागर सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। अटलांटिक महासागर में यूरोप और अफ्रीका महाद्वीपो को नई दुनिया के महाद्वीपों से पृथक करता हैं। इस महासागर का आकार अंग्रेजी के शब्द 8 की तरह और S की तरह माना जाता है। अंध महासागर यानी के अटलांटिक महासागर के अधीन विश्व का सबसे अधिक जल प्रवाह क्षेत्र है.
3) हिन्द महासागर : भारत की भूमि से जुड़ा हुआ महासागर हिंद महासागर दुनिया का तीसरे नंबर का सबसे बड़ा महासागर है। इस महासागर का क्षेत्रफल करीब 70,560,000 किलोमीटर स्क्वायर है। संपूर्ण पृथ्वी की सतह पर उपस्थित पानी का लगभग 20% भाग हिंद महासागर में समाया हुआ है। विश्व में केवल यही एक महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम यानी कि हिंदुस्तान से जुड़ा हुआ है। अंग्रेजी में हिंद महासागर को इंडियन ओसियन कहा जाता है। इस महासागर को संस्कृत में रत्नाकर यानी कि रत्न उत्पन्न करने वाला सागर कहा जाता है। हिंद महासागर में स्थित सबसे बड़ा द्वीप मेडागास्कर है जो विश्व का चौथा सबसे बड़ा द्वीप समूह हैं। हिंद महासागर में तेल का भंडार है और इस कारण हिंद महासागर आर्थिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। जैव विविधता के क्षेत्र में भी हिंद महासागर काफी आगे है.
4) दक्षिणी ध्रुवीय महासागर : दुनिया का चौथा सबसे बड़ा महासागर दक्षिणी ध्रुव है जिसको हम अंटार्कटिक महासागर नाम से जानते हैं। यह विश्व के सबसे दक्षिण में मौजूद है। इस महासागर ने पूरी तरह से अंटार्कटिका महाद्वीप को घेरा हुआ है। इस महासागर में ऊपर की और ठंडा और नीचे की और गर्म जल है। ध्रुवीय होने के कारण यह महासागर अधिकतर बर्फ जमा रहता है। इस महासागर से बर्फ के टुकड़े टूट कर अन्य महासागरों में जाते हैं और कुछ टुकड़े तो 100 वर्ग मील से भी अधिक बड़े और 1000 फिट से भी अधिक मोटे होते हैं। दक्षिणी ध्रुव महासागर के उत्तर में पेड़-पौधे और जीव-जंतु की संख्या अधिक है। ध्रुवीय क्षेत्र में होने के कारण इस महासागर को अधिक उपयोगी नहीं माना जाता.
5) उत्तर ध्रुवीय महासागर : यह दुनिया का सबसे छोटा महासागर है जिसे हम आर्कटिक महासागर के नाम से भी जानते हैं। सबसे छोटा महासागर होने के साथ-साथ यह महासागर सबसे उथला महासागर भी है। कुछ विद्वानों के द्वारा इस महासागर को केवल एक सागर माना गया है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन ने इसे एक महासागर माना है। कुछ विद्वान इसे अंध महासागर के भूमध्य सगरो में से एक मानते है। इस महासागर की यह खासियत है कि यह साल भर बर्फ से ढका रहता है। इस महासागर की औसत लवणता अन्य महासागरों की तुलना में काफी कम है। इस महासागर का पानी काफी कम मात्रा में उच्च लवणता वाले महासागरों में बहकर जाता है। इस महासागर का तापमान और लवणता का मौसम के अनुसार बदलती रहती है क्योंकि यहां पर जमा हुआ बर्फ जमता और पिघलता रहता है.

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