पृथ्वी की आंतरिक संरचना कैसी है (भूगोल) - Structure of The Earth

वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी अब तक का केवल एक मात्र ऐसा ग्रह है जहां पर जीवन पाया गया है। संपूर्णता के घटक इस ब्रह्मांड में सबसे रोचक ग्रह पृथ्वी ही लगता है। हम सभी पृथ्वी के निवासी हैं और इस पिंड के बारे में जितना जाने उतना ही कम है। पृथ्वी की शुरुआत में सूरज की तरह एक आग का गोला थी लेकिन यह ठंडे होते होते आज एक संपूर्ण ग्रह बन चुकी है जहां पर जीवन संभव है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी की आंतरिक संरचना कैसी होगी? आज के इस पोस्ट में हम पृथ्वी की आंतरिक संरचना यानी की Structure of Earth in Hindi के बारे में बात करेंगे.

पृथ्वी की आंतरिक संरचना किस तरह की है?

पृथ्वी शुरुआत में एक आग का गोला की और ठंडी होने के कारण इसमें कुछ परिवर्तन आए। पृथ्वी की आंतरिक संरचना परतदार है। पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझाने के लिए वैज्ञानिक प्याज का उदाहरण देते हैं। जिस तरह से प्याज में झिल्लियां पाई जाती है उसी तरह के अंदर अलग अलग परते पायी जाती है। पृथ्वी में मुख्य रूप से 3 परत पायी जाती है। पहली परत भूपर्पटी, दूसरी परत मेंटल, तीसरी परत कोर है.
पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी हमें कई माध्यमों जैसे कि ज्वालामुखी आदि के करण चलता है क्योंकि पृथ्वी के अंदर अधिक तापमान के कारण अधिक गहराई में जाना नामुमकिन है। पृथ्वी के अंदर इतना अधिक तापमान है कि खुदाई करने की यंत्र और अत्याधुनिक साधन भी वहां पिघल सकते हैं.

पृथ्वी की आंतरिक परते - Layers of Earth in Hindi

भूपर्पटी : भूपर्पटी को अंग्रेजी में क्रस्ट के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी की ठोस परत होती है और हम इसे देख सकते हैं। रेगिस्तान से लेकर महासागर और पहाड़ से लेकर पठार तक सभी इसी परत पर पाए जाते हैं। भूपर्पटी का निर्माण इग्नियस प्रोसेस के माध्यम से हुआ और बाद में यह कटाव, मानवीय प्रभाव, ज्वालामुखी और अवसादन आदि के कारण प्रभावित होती रही और आज भी हो रही है। भूपर्पटी को दो भागों में बांटा गया है जिसमें से पहली महासागरीय भूपर्पटी और दूसरी धरातलीय भूपर्पटी है। इसके अलावा भूपर्पटी को प्राथमिक द्वितीयक और तृतीयक भागों में बांटा गया है.
भुप्रावार : इस परत का अंग्रेजी नाम मेंटल है और सभी लोग इसे मेंटल के नाम से भी जानते हैं। किसी भी ग्रह की भूपर्पटी के बाद उसके नीचे की परत भप्रावार यानी की मेंटल होती है। यह परत भूपर्पटी के मुकाबले काफी ज्यादा मोटी होती है और अगर बात करें पृथ्वी की तो पृथ्वी पर इसकी मोटाई 2900 किलोमीटर से अधिक है। पृथ्वी की मेंटल एक तरह से कोर और क्रस्ट के बीच में सिलिकॉन की चट्टान है। मेंटल का शुरुआती तापमान करीब 400 सेल्सियस के आसपास रहता है और मेंटल के आखिर में तापमान करीब 4000 सेल्सियस तक रहता है जो कि अच्छी अच्छी धातु को भी पिघला सकता है.

कोर : यह पृथ्वी की सबसे आंतरिक परत है। इसके दो भाग होते है जिसमें से पहला बाहकोर और दूसरा आंतरिक कोर है। कोर का बाहरी भाग तो लिक्विड होता है जिसकी वजह से पृथ्वी पर सन्तुलन बना रहता है। इसका बहरी भाग तरल होता है जिसमे लावा आदि होता है। विश्व की बड़ी बड़ी ज्वालामुखी में लावा भी इसी क्षेत्र से निकलता है। इसका आंतरिक भाग सॉलिड यानि की ठोस होता है। बाह्य भाग 2260 किलोमीटर तक लिक्विड से भरा हुआ है और आंतरिक भाग 1216 किलोमीटर मोटा है। यह एक अत्यंत ठोस जगह है. इसके अलावा आंतरिक संरचना को स्वेस के नियम के अनुसार सियाल, सिमा और निफे के द्वारा भी समझा जाता है.
सियाल : यह परत ग्रेनाइट से बनी हुई है। यह सिलिका और एल्युमिनियम से मिलकर बना हुआ है। सिलिका (Si) और एल्युमिनियम (Al) की बनी होने के कारण ही इसे सियाल (SiAl) कहा जाता है.
सिमा : सियाल की ठीक निचे की परत को सिमा कहा जाता है। यह भारी आग्नेय चट्टानों (Igneous Rocks) के द्वारा बनी हुई है। यह सिलिका (Si) और मैग्नीशियम (Ma) के द्वारा बनी हुई हैं और इस कारण इसे सिमा (SiMa) कहा जाता है। इसका औसतन घनत्व 2.9 से 4.7 के बिच में है.
निफे : यह परत ठीक सिमा के निचे है। यह कठोर मानी जाती है और कहा जाता है की चुम्बकत्व धर्म यानी कि गुरुत्वाकर्षण बल भी किसी के कारण होते हैं। इसका औसत घनत्व 12 माना जाता है.

संबधित उपयोगी जानकारी पढ़ें:




This "GK in Hindi" website for sale : shrwanswami@gmail.com