Dharti Mata Ki Kahani (Poem in Hindi)- धरती माता की कहानी?


इस पोस्ट में आपको धरती माता पर कविता या धरती माता की कहानी (dharti mata ki kahani) मिलेगी तो चलिए पढ़ते हैं और इस Poem का आनंद लेते हैं.

dharti mata ki kahani - धरती माता पर कविता?

एक माँ थी ! इसके एक बेटी व एक बीटा था ! दोनों भाई-बहिन छोटे-छोटे थे ! माँ गरीब थी ! वह मजदूरी करके अपना गुजारा चलाती थी ! धीरे-धीरे बच्चे बड़े होने लगे ! बेटी शादी के योग्य होने लगी ! माँ बूढ़ी हो गई ! माँ ने बेटे से कहा, 'बेटा तेरी बहिन बड़ी हो गई है अत: तुम्हारे जैसा घर वर देखकर उसकी शादी करना!' ऐसा कहकर माँ तो कुछ दिनों में मर गई ! भाई गावं-गावं घुमा लेकिन बहिन के योग्य कोई वर नहीं मिला ! वह घूम-घूम कर थक गया ! बेठे-बेठे उसने सोचा की, 'में ही इससे शादी कर लूँ!' ऐसा सोचकर उसने चुनडी लाई और सामान लाया ! बहिन ने कहा, 'यह सब सामान क्यूँ लाया है भाई?' भाई बोला, तेरी शादी है ! मोहल्ले वालों ने बहिन से कहा की तुम्हारा भाई ही तुमसे शादी कर रहा है ! बहिन भाई से बोली, कोई मेहमान आए नहीं ! मेरी शादी किससे कर रहे हो ! भाई कुछ नहीं बोला तो बहिन समझ गई.
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बहिन का धरती में समां जाना?

उसने एक लोटा लिया, चुनडी लि और चप्पल पहनकर जंगल में रवाना हुई ! गायों के ग्वालों ने पूछा वन में क्यों जा रही हो? वह कुछ नहीं बोली ! वन में जाकर धरती माँ को पुकारने लगी ! बोली-हे माँ ! तू ही मेरी लाज रखना नहीं तो अन्याय हो जायेगा ! में क्या करूँ ? मुझे अपनी गोद में ले लो, नहीं तो यहाँ मर जाउंगी ! धरती माँ फटी तो बहिन ने एक तरफ लोटा, चुनडी, चप्पल रख दिए और वह धरती में जाने लगी ! इतने में दोड़ता हुआ भाई वन में आया और ग्वालों से पूछा की उसकी बहिन किस तरफ गई है ! ग्वालों ने कहा तेरी बहिन उधर गई है ! वह बहिन-बहिन पुकारता हुआ दौड़ा तो बहिन धरती माँ के अन्दर समा गई थी थोड़े बाल बाहर दिख रहे थे ! उसने बहिन के बाल मुट्ठी में पकडे और रोने लगा, बहिन तू सत के धरती माँ की गोद में समां गई ! मेरी बुद्धि भर्ष्ट हो गई थी ! माँ का वचन निभाने के लिए मेरे जैसा कोई वर नहीं मिला ! इसलिए विचार आया ! पर धरती माँ ने सत्य के लिए बेटी को अपने में समां लिया ! जो बाल बाहर थे वे ध्रों यानि दूर्वा हो गई ! इसलिए औरतें कहानी सुनती है और लोटा, चप्पल, चुनडी, एक बर्तन में हरे मुंग, एक लड्डू कुंवारी कन्या को देगी उसको डरती माता सुखी रखेगी?

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