story of karwa chouth in hindi - करवा चौथ की कहानी?


इस पेज में story of karwa chouth vrat in hindi या करवा चौथ व्रत की कहानी/कथा और करवा चौथ के उजमण की विधि की जानकारी दी गई है? चलिए इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं.

karwa chouth vrat story in hindi - करवा चौथ व्रत की कथा?

एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी ! सातों भाई अपनी बहन के साथ रहकर खाना खाते थे ! कार्तिक लगते ही करवा चौथ आई ! भाई अपनी बहन से बोले, आ बहन खाना खा ले ! बहन बोली, आज तो मेरा चौथ का व्रत है ! चाँद देखकर खाना खाऊँगी ! भाइयों ने सोचा, आज तो हमारी बहन भूखी रह जाएगी, इसलिए एक भाई तो दिया (टोर्च) लाया, एक भाई चलनी लेकर टाइल पर चढ़ गया और चलनी में चाँद दिखा दिया ! भाई बोले, बहन चाँद उग गया, अरख दे ले ! बहन बोली, आओ भाभियों अरख दे लो ! भाभियाँ बोली की ननद जी अभी तो आपका ही चाँद उगा है ! हमारा तो रात को उगेगा ! बहन अरख देकर भाइयों के साथ जीमने बेठी ! पहली ग्रास में बाल आया, दुसरे में छींक आई और तीसरा ग्रास तोड़ते ही ससुराल से बुलावा आ गया ! वो कपडे निकालने लगी तो सारे कपडे सफ़ेद ही निकलते ! माँ बोली, तेरे भाग्य में जो लिखा है वही होगा ! माँ ने उसे सफ़ेद कपडे ही पहना दिए और हाथ में सोने का रुपया दिया और कहा जो तुम्हें पूरा आशीर्वाद दे, उसे यह सोने का रुपया दे देना और पल्ले को मोड़कर गांठ दे देना ! वो आगे गई तो उसे पूरा आशीर्वाद किसी ने नहीं दिया ! एक छोटी-सी ननद पालने में सो रही थी वो बोली, "सिली हो सपूती हो सात पूत की माँ हो, थारा अमर सुहाग हो!" उसने सोने का रुपया ननद को देकर पल्ले के गांठ बांध लि ! घर में गई तो रोना-कुटना लगा था ! उसका पति मर चूका था, वो बोली, मैं तो अपने पति को जलाने नहीं दूंगी ! मैं भी इनके साथ जंगले में रहूंगी ! ननद रोज उसको जंगले में ही खाना दे आती ! अब गाजती-धोरती माहि चौथ आई ! करवा ले साथ भाइयों की प्यारी करवा ले दिन में चाँद ऊगानी करवा ले बहुत भूखी करवा ले ! माता वो मेरे पिछले जन्म के दुश्मन थे तुझे मेरा सुहाग देना पड़ेगा ! मेरे से बड़ी बैशाखी की चौथ आएगी उसके पैर पकड़ लेना ! बैशाखी की चौथ आई, उसके पैर पकड़ लिए तो चौथ माता बोली, छोड़ पापिन मेरे पावं ! वो बोली, माता वो मेरे भाई नहीं थे पिछले जन्म के बैरी, दुश्मन थे ! आपको तो मेरा सुहाग देना ही पड़ेगा ! मुझसे बड़ी भादवे की चौथ आएगी उसके पावं मत छोड़ना, अगर उसके पावं छोड़ दिए तो तुझे कहीं जगह नहीं है ! भादवे की चौथ आई "करवा ले भाइयों की प्यारी करवा ले, दिन में चाँद उगानी करवा ले, बहुत भूखी करवा ले !" उसने माता के पैर पकड़ लिए, छोड़ पापिनी ! मेरे पैर पकड़ने लायक नहीं है ! हे माता ! वो मेरे भाई नहीं पिछले जन्म के दुश्मन थे ! आपको बताना पड़ेगा, मैं क्या करूँ ! माता बोली, तुझे इतनी शिक्षा कौन दे गया ! माता मुझे किसी ने कुछ नहीं बताया, आप ही बताओ मैं क्या करूँ ! तब माता बोली मेरे से बड़ी करवा चौथ आएगी उसके पावं मत छोड़ना ! वो जो मांगे वो बस सामान मंगा लेना बेस और सारे सुहाग का सामान मंगा लेना ! दुसरे दिन ननद रोटी देने आई तो वो बोली, ननद जी काजल, मेहंदी बिन्दो, रोली, मोली, सारा सुहाग का सामान लाना और बेस भी लाना ननद ने एक-एक करके सारा सामान ला दिया.
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कार्तिक की करवा चौथ आई, करवा ले करवा ले दिन में चाँद देखनी करवा ले, बहुत भूखी करवा ले ! माता वे मेरे पिछले जन्म के दुश्मन थे और ये कहकर उसने माता के पैर पकड़ लिए, छोड़ पापिनी मेरे पावं, तू मेरे पावं पकड़ने लायक नहीं है ! माता आपको मेरा सुहाग देना पड़ेगा ! तेरे पास जंगले में सुहाग की क्या चीज है ! वो बोली, माता आप मांगो वो सभी है ! माता बोली, रोली, मोली, सठेली, गठेली, पताशा, गेहूं, करवा, जलेबी ला, उसने सभी चीजें निकालकर दे दी ! माता बोली, तुझे ये ज्ञान कहाँ से आया ! हे मता ! मुझे जंगले में ये ज्ञान कौन देगा ! मुझे तो सारा ज्ञान आपने ही दिया है ! माता ने सारी सुहाग की चीजों को घोलकर छींटा दे दिया तो उसका पति अकड़कर बेठ गया और जाते हुए माता ने झोंपड़ी को लात मारी तो महल-मंदिर हो गए ! सुबह ननद खाना देने आई तो वो बोली, मेरे भाई-भाभी कहाँ गए ! भाभी ने ऊपर से आवाज लगाई, ननद जी आओ ! हम तो यहाँ बेठे है ! ननद ने पूछा, भाभी ये सब कैसे हुआ, भाभी बोली, रात में चौथ माता आई थी वो ही ये कर गई है ! जाओ ननद, माता जी को बोलो की पुरनी चौथ का उजलवाओं और नई घड़ाओं और हमें गीत गाते लेने आओ ! ननद माँ को जाकर बोली, माँ भाभी ने तो भाई जो जिन्दा करवा दिया और भाभी बोलती है की उनको गीत गाते हुए लेने चलो ! सासु गीत गाती बहु को लेने गई, बहु सास के पेरों में पड़ी, सासु बोली, बहु घर चलो और चौथ माता का उजरना करके सास बहु-बेटे को घर लेकर आ गई और सारी नगरी में कहलवा दिया की पति की पत्नी, बेटे की माँ, बारह महीने की तेरह, नहीं तो चार या दो तो हर कोई करना ! जिसके कोई नहीं हो वो अपने दीदे-गोड की कानर जैसे-माता ने साहूकार की बेटी को सुहाग दे दिया वैसे सबको देना ! कहते सुनते हुनकर भरते.

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